चंचल लाहिड़ी जादू में पारंगत थे मगर इस बार एक अद्भुत जादू उनके लिए महंगा साबित हुआ। वे हाथ-पैर में जंजीर बांधकर पानी में तो उतरे मगर उसके बाद क्या हुआ किसी को नहीं पता। हुगली नदी में दिन भर चली तलाश के बाद आखिरकार जादूगर चंचल लाहिड़ी (41) का लाश बरामद हो गया। चंचल रविवार को हुगली में जादू का एक कारनामा करते हुए गायब हो गए थे। चंचल का शव सोमवार को हावड़ा के पास से मिला। चंचल लाहिड़ी को स्टेज पर मैंड्रेक नाम से भी जाना जाता था।

शुरुआती पुलिस तलाश से पता चला है कि अपने जादूगरी के कारनामे में चंचल लाहिड़ी ने कई गलतियां की थीं, जिनकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। स्वयं को जंजीरों और रस्सियों से बांधकर पानी के भीतर उतरना और सकुशल बाहर आ जाना इस जादुई करतब को तकरीबन 100 साल पहले अमेरिकी जादूगर हैरी हुडिनी ने मशहूर किया था।

जिस वक्त लाहिड़ी को पानी में फेंका गया उनके हाथ और पैर बंधे हुए थे। वह इन्हें पानी के भीतर कैसे खोलेंगे- इस प्रश्न का जवाब लाहिड़ी अपनी टीम को भी नहीं दे पाए थे। इतना ही नहीं, उन्होंने ऐसे कपड़े और दूसरी चीजें पहन रखी थीं जिनकी मौजूदगी में तेज बहाव में तैरना बहुत कठिन साबित हुआ होगा।


मशहूर जादूगर पीसी सरकार भी इसी तरह के करतबों में बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि शायद लाहिड़ी को और ज्यादा प्रयास की आवश्यकता थी। लाहिड़ी को पानी में उतारने के 15 मिनट बाद ही उनकी टीम ने संकेत दे दिया था कि उन्हें बचाने की प्रयास शुरू की जाए।


लाहिड़ी के असिस्टेंट और भतीजे रुद्रप्रसाद लाहिड़ी का कहना है कि वे अपने बंधन खोलकर ऊपर आ गए थे और उन्होंने हाथ भी हिलाया था। किन्तु अचानक वह गायब हो गए और फिर नहीं दिखे। हम परेशान हो गए और फिर पुलिस को बुलाया। चंचल लाहिड़ी की मां उमा लाहिड़ी ने अपने बेटे को याद करते हुए कहा कि उसे बचपन से ही जादू पसंद था। बहुत कम उम्र में ही वह अपने कारनामो के लिए मशहूर हो गया था।


पुलिस के अनुसार लाहिड़ी दोपहर 12:30 पर डूबे थे। इससे यह साफ नहीं होता कि वह प्रयास कर रहे थे या अपने जादुई करतब को अंजाम दे रहे थे। विडंबना है कि अपने स्टंट से पहले रविवार को लाहिड़ी ने कहा था कि अगर आप किसी खतरनाक करतब को कामयाबी से कर ले जाते हैं तो दुनिया आपको जादूगर कहती है। किन्तु अगर आप नाकाम हो जाते हैं तो वह ट्रैजेडी में बदल जाता है