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1) धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परखिए चारी।।
तुलसीदास का कहना था कि वक्त खराब होने पर धीरज, मित्र, धर्म और नारी की परीक्षा होती है क्योंकि अच्छे वक्त में तो सब साथ देते हैं लेकिन बुरे वक्त में कोई भी साथ नहीं देना चाहता है । इसलिए उस वक्त नारी यानी कि स्त्री की भी परीक्षा होती है ।

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2) जननी सम जानहिं पर नारी। तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे।।
तुलसीदास का कहना था कि जो पुरुष अपनी पत्नी को छोड़कर बाकियों को अपनी मां-बहन के बराबर समझता है उसके मन में ईश्वर वास करते हैं ।

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3) तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर। सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।।
तुलसीदास का कहना था कि सुंदरता देखकर बुद्धिमान से बुद्धिमान व्यक्ति भी मूर्ख हो जाता है । सुंदरता के पीछे कभी नहीं भागना चाहिए । जैसे कि मोर सुंदर है लेकिन वह आखिर सांप को ही खाता है ।

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