वीरेंद्र सहवाग से अपनी तुलना पर रोहित शर्मा ने दिया ऐसा जवाब
बीते दिनों रोहित शर्मा ने बतौर ओपनर जब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में बढ़िया बल्लेबाज़ी की थी उसके बाद रोहित की तुलना सहवाग से की जाने लगी, क्योंकि रोहित भी मध्यक्रम बल्लेबाज़ से ओपनर बने हैं जैसे कभी वीरेंद्र सहवाग बने थे ।
वैसे इन दिनों वीरेंद्र सहवाग से अपनी तुलना पर रोहित ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा ऐसा लोगों का मानना है कि मेरा और सहवाग का बल्लेबाज़ी का स्टाइल एक सा है। पर सच यह है कि सहवाग, सहवाग हैं जो उन्होंने किया वह असाधारण हैं मेरे लिए यह जरूरी है कि टीम मुझसे क्या चाहती है अगर मैं वह कर पाता हूं तो उससे ज्यादा खुश होता हूं। बेशक सहवाग उस तरह से खेले, जिसे वह पसंद करते थे और टीम भी यही चाहती थी कि वह वैसे ही खेलें।

यह स्थिति अब मेरे साथ है।
मैं उसी तरह खेलना चाहता हूं जैसे मेरी टीम मुझसे चाहती है। अगर मैं ऐसा कर पाता हूं तो कोई परेशानियां दूर कर सकता हूं। बता दें कि रोहित शर्मा हाल ही में एक बहुत बड़े ओपनर बल्लेबाज़ बन कर उभरे हैं। वह वैसे टेस्ट बल्लेबाज़ बने हैं जैसी कि टीम इंडिया को जरूर थी।
रोहित ने आगे यह भी कहा कि मैं जो भी सोचता हूं वैसे ही मैदान पर करना भी चाहता हूं। और अगर मैं ऐसा कर पाता हूं तो अच्छी बात है लेकिन कई बार ऐसा नहीं भी हो पाता है जैसे आप सोचते हैं और वैसे ही कर पाते हैं तो उससे ज्यादा गर्व का कोई पल नहीं होता ।जब सीरीज खत्म होती है तो मैं ऐसा ही सोचता हूं मैं घर जाता हूं और लेटर सोचता हूं कि मुझे खुशी महसूस होती है

वैसे इन दिनों वीरेंद्र सहवाग से अपनी तुलना पर रोहित ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा ऐसा लोगों का मानना है कि मेरा और सहवाग का बल्लेबाज़ी का स्टाइल एक सा है। पर सच यह है कि सहवाग, सहवाग हैं जो उन्होंने किया वह असाधारण हैं मेरे लिए यह जरूरी है कि टीम मुझसे क्या चाहती है अगर मैं वह कर पाता हूं तो उससे ज्यादा खुश होता हूं। बेशक सहवाग उस तरह से खेले, जिसे वह पसंद करते थे और टीम भी यही चाहती थी कि वह वैसे ही खेलें।

यह स्थिति अब मेरे साथ है।
मैं उसी तरह खेलना चाहता हूं जैसे मेरी टीम मुझसे चाहती है। अगर मैं ऐसा कर पाता हूं तो कोई परेशानियां दूर कर सकता हूं। बता दें कि रोहित शर्मा हाल ही में एक बहुत बड़े ओपनर बल्लेबाज़ बन कर उभरे हैं। वह वैसे टेस्ट बल्लेबाज़ बने हैं जैसी कि टीम इंडिया को जरूर थी।
रोहित ने आगे यह भी कहा कि मैं जो भी सोचता हूं वैसे ही मैदान पर करना भी चाहता हूं। और अगर मैं ऐसा कर पाता हूं तो अच्छी बात है लेकिन कई बार ऐसा नहीं भी हो पाता है जैसे आप सोचते हैं और वैसे ही कर पाते हैं तो उससे ज्यादा गर्व का कोई पल नहीं होता ।जब सीरीज खत्म होती है तो मैं ऐसा ही सोचता हूं मैं घर जाता हूं और लेटर सोचता हूं कि मुझे खुशी महसूस होती है